बच्चे पापा के बिना नहीं रहते, प्लीज एक साथ रहने दें...
पापा के बिना बच्चे रह नहीं पा रहे हैं साहब। प्लीज हम दोनों पति-पत्नी को एक क्वारेंटाइन कैम्प में कर दिजिए। यह व्यथा है एक प्रवासी परिवार की जिसे वैश्विक महामारी कोरोना ने एक दूसरे से दूर कर अलग-अलग क्वारंेटाइन कैम्प में रहने को मजबूर कर दिया हैं।
ग्राम पंचायत महगामा के लड़ैयाटांड निवासी संदीप कुमार की पत्नी प्रेमलता कुमारी कहती है कि जालंधर में रहकर पति-पत्नी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर आराम से जिंदगी व्यतीत कर रही थी।लाॅकडाउन की वजह से खाने पीने की परेशानी के कारण चार दिन पूर्व ही जैसे तैसे प्रदेश से लौटी।
अचानक इस बीमारी ने उनके जीवन में आकर सब कुछ तहस नहस कर दिया। स्थिति ऐसी बनी कि पति मध्य विद्यालय गोविंदपुर में रह रहे हैं तो पत्नी तीन बच्चों के साथ मध्य विद्यालय सारोबाग में रह रही हैं। पीड़ित महिला का कहना है कि छोटा बच्चा अपने पापा के बिना एक रात भी चैन से नहीं सोया।
बस एक रट लगाए रहता है पापा कहां है उनको बुला दो। पीड़ित महिला उस दिन को कोस रही है। जब मुखिया के कहने पर वह क्वारंेटाइन हुई थी। उसे समझाया गया कि स्वास्थ्य जांच के पश्चात होम क्वारेंटाइन कर दिया जाएगा। परंतु दोनों को अलग-अलग क्वारंेटाइन कैम्प में भेज दिया गया।
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