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कोरोना को हराना है तो सरकार की तरह घर में भी बांटें काम और अधिकार

कोरोना को हराना है तो सरकार की तरह घर में भी बांटें काम और अधिकार

पटना | सरकार ने जनता कर्फ्यू का प्रयोग सफल देख कोरोना को तत्काल रोकने के लिए लॉकडाउन का सहारा लिया था। लॉकडाउन नहीं होता तो अमेरिका से भी बुरा हश्र होता, यह तो मानना ही पड़ेगा। लॉकडाउन की नीति के दो उद्देश्य पूरे हो चुके हैं- इलाज की व्यापक व्यवस्था बगैर संक्रमण विस्फोट नहीं हुआ और अब केस सामने भी आ रहे तो देश में हर जगह जांच-इलाज की व्यवस्था है। लॉकडाउन के बावजूद आवागमन और मेल-मिलाप के कारण ही कोरोना का यह रूप सामने है।

लोगों की रोजी-रोटी पर असर और देश की अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट के बाद तेज होती आवाज को सुन सरकार ने लॉकडाउन की औपचारिकता में सारी छूट दे दी है लेकिन, यह ध्यान देना होगा कि चालू लॉकडाउन में ही बिहार में अबतक 3000 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए तो आगे क्या होगा! देश को पूरी तरह ‘लॉक’ रखना संभव नहीं देख कुछ ताकीदों और थोड़ी सख्तियों के साथ लॉकडाउन में यह ढील दी गई है। लेकिन, लोग समझ बैठे हैं कि खतरा खत्म हो रहा है, सरकार ही छूट दे रही है तो सबकुछ नियंत्रण में है।

जबकि, हकीकत यह है कि अब इसी खतरे के बीच हमें जीना सीखना है। तो? अब अपनी नीति बनाएं, खुद बचें, अपनों को बचाएं। बिहार में तो लॉकडाउन अब सिर्फ औपचारिक ही बचा है, क्योंकि बचाव के प्रावधान और सख्ती की ताकीद कर जन-जीवन सामान्य बनाने वाली सारी चीजें-सेवाएं खुल गई हैं। इसलिए, बिहार की स्थितियों और कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए आपकी लड़ाई घर से बाहर तक खुद आपको ही लड़नी है। कई बातें शुरू से सुनते आ रहे, बहुत सारी अब भी जुड़ रही हैं। अब योजनाबद्ध तरीके से अपनी तय नीतियों पर चलकर ही कोरोना से लड़ाई लड़ी जा सकती है। कवच हर तरह का है, मगर इसे लगाना खुद है।

गृह-नारी अधिकार मंत्रालय:नारी की अधिक जिम्मेदारी उनके अधिकार भी बढ़ गए

आपकी अपनी सरकार में सबसे बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं को मिली है और अधिकार भी। महिलाओं को ध्यान रखना होगा कि किसी में कोरोना का कोई लक्षण लगे या कोई सदस्य किसी संदिग्ध से मिल आया हो तो उसे होम क्वारेंटाइन कराएं। घर के हर सदस्य को एक्टिव रखने के लिए काम बांटने का अधिकार महिलाओं के हाथ में है। घर में वायरस के प्रवेश की हर आशंका को दूर रखने का जिम्मा भी सबसे ज्यादा महिलाओं पर ही है।

स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय:कोरोना की हार का एक्शन प्लान तैयार, चूक जानलेवा

एक जमाने में प्लेग-हैजा को भगाया, अब कोरोना को हराने की अहम जिम्मेदारी भी आमजन के स्वास्थ्य मंत्रालय पर है। ज्ञान का हथियार और बचने के संसाधन उपलब्ध हैं। बिना मास्क एक-दूसरे से सटकर बातों को तत्काल रोकना अहम जिम्मेदारी है। इसके अलावा ऐसा नॉनवेज खाने की छूट नहीं मिलनी चाहिए, जो कई लोगों से छूकर आया हो। च्यवनप्राश, गिलोय आदि लेना अभी अच्छा रहेगा। खुली हवा में रहना शरीर का अधिकार है, उसे देना होगा।

उपार्जन एवं व्यय मंत्रालय:खर्च काटें, पैसे बचाएं तभी काम-धंधे को बढ़ा सकेंगे

किसी की सैलरी कटी, किसी की नौकरी गई, किसी का धंधा मंदा पड़ गया- इसी पैसे में फिलहाल जीना है। उपार्जन की संभावनाएं घटी हैं तो पैसे बचाने के लिए घर-बाहर का बजट नियंत्रित करना होगा। स्वरोजगार के लिए बैंकों में लोन सहज किया गया है, उन विकल्पों के साथ जरूरतमंद अच्छे प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। इन सभी में कोरोना से लड़ाई भी करनी है, इसलिए काम के लिए निकलें या जेब में पैसा लाने-खर्च करने के लिए...पूरी तैयारी रखें।

मन: शक्ति मंत्रालय:टाइम और वर्क मैनेजमेंट के जरिए मिलेगी मन की बुलंदी

अब आपकी सरकार मन की शक्ति से ही ही चलेगी। कोरोना के खात्मे का कोई टाइमलाइन नहीं है, इसलिए टाइम और वर्क मैनेजमेंट से लोड बांटें ताकि घर के किसी सदस्य पर अतिरिक्त मानसिक दबाव नहीं हो। दबाव नहीं होगा तो चिड़चिड़ापन नहीं होगा। इससे मानसिक बुलंदी रहेगी। इस समय अभी अच्छी आदतों को सीखना हरेक का कर्तव्य है और सिखाना भी सभी का अधिकार।

सामाजिकता मंत्रालय:मिलने की रिश्तेदारी फिलहाल नहीं पर जरूरतमंद की मदद भी दूर से ही जरूरी

सामाजिकता हर घर का जरूरी मंत्रालय है, लेकिन लॉकडाउन में रियायत से गलत अधिकार नहीं मिला है। यह छूट इसलिए दी जा रही है कि काम-धंधे को स्थायी रूप से बंद रखना संभव नहीं। अब ध्यान में रखना होगा कि कोई बात करने दो गज से करीब आए तो हम अपने पैर उतना ही पीछे कर लें। कोई सामने हो तो तेज बोलने से भी ड्रॉपलेट गिरेगा।

पथ-परिवहन-यात्रा मंत्रालय:यात्रा का अधिकार मिला तो संक्रमण का खतरा साथ चलेगा, चौकस रहें खुद

यात्रा का अधिकार मिल रहा है, लेकिन बचना भी कर्तव्य है क्योंकि संक्रमण का खतरा भी साथ-साथ ही चलेगा। ट्रेनों का परिचालन बढ़ेगा, नितांत आवश्यक हो तभी यात्रा करें। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए यात्रा के समय चौकस रहें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। सभी चीजें न छुएं। हाथ साफ करते रहें। मास्क पहनें। इसके फायदे दूसरों को भी बताएं।

कॉलर ट्यून के जरिए मार्च से ही दिया जाने लगा था पहला सबक
मार्च के पहले हफ्ते से मोबाइल उपभोक्ताओं को पहली सीख मिलनी शुरू हुई। किसी को कॉल लगाते ही कॉलर ट्यून में खांसने की आवाज के बाद यह सीख दी जाने लगी कि खांसते या छींकते वक्त अपने मुंह को रुमाल या टिश्यू पेपर से ढंकें, अपने हाथों को साबुन से धोएं। अपनी आंख, नाक, मुंह को छूने में सावधानी बरतें।

बचना सीखने को ही दिए गए थे लॉकडाउन 3.0 तक 54 दिन

25 मार्च से 17 मई के बीच तीन लॉकडाउन में 54 दिन सख्ती रही। लॉकडाउन 4.0 में आकर ज्यादातर काम की रियायत मिली। कोरोना के असर वाले 20 देशों में सेे भारत ने सबसे कम मरीज रहते हुए लॉकडाउन लागू किया था। पहले लॉकडाउन से 3.0 तक प्रधानमंत्री खुद लोगों को कोरोना से बचाव के लिए जरूरी सीख देते हुए बार-बार नजर आए। तीन बातों पर शुरू से फोकस किया गया कि सामाजिक दूरी, मास्क और हैंडवाश। पूरी दुनिया में बचाव का आज भी यही आधार है। ब्रिटेन जैसे विकसित देश ने 1 जून तक लॉकडाउन में रियायत देते हुए ‘स्टे होम’ की जगह ‘स्टे अलर्ट’ का जीवन-मंत्र दिया है।



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If you want to defeat Corona, share work and rights at home like the government


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