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क्वारेंटाइन सेंटरों में 17207 प्रवासी, सभी के सैंपल भी लें तो जांच में लग जाएंगे नौ माह

क्वारेंटाइन सेंटरों में 17207 प्रवासी, सभी के सैंपल भी लें तो जांच में लग जाएंगे नौ माह

जिले में लगातार कोरोना मरीज बढ़ रहे हैं। 15 दिन में ही संख्या 134 हो गई। फिर भी जिम्मेदारों ने सैंपलिंग और स्क्रीनिंग नहीं बढ़ाई। इसके उलट मायागंज अस्पताल में हो रही स्क्रीनिंग तक बंद कर दी। यहां सिर्फ मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। कोरोना पर गंभीर रहने वाले स्वास्थ्य विभाग की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक जिले में 50 हजार से ज्यादा प्रवासी आए। इनमें 36139 होम क्वारेंटाइन में हैं, 17207 लोग क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे हैं। इन्हीं सेंटरों में रोज लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। इसके बावजूद सैपंलिंग का आंकड़ा 2910 ही है। मरीजों के बढ़ने के साथ ही टेस्ट की संख्या भी घट गई। हद यह है कि रोजाना जिले में 60 मरीजों की ही जांच करने की सुविधा है। ऐसे में मरीजों की बढ़ रही रफ्तार के बीच सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि सिर्फ क्वारेंटाइन सेंटराें में रह रहे 17207 लोगों की सैंपलिंग करने में ही विभाग को नौ माह से ज्यादा लग जाएंगे। इस बीच संक्रमण की चेन बनने की आशंका बढ़ेगी।
प्रशासन के रिकॉर्ड बताते हैं, जिले में अब तक 50 हजार से ज्यादा प्रवासी लौटे हैं। इनमें 17207 लोग शनिवार तक क्वारेंटाइन सेंटरों में रह रहे हैं। 36139 लोग होम क्वारेंटाइन में हैं। लगातार मिल रहे मरीज क्वारेंटाइन सेंटरों से निकल रहे हैं। इस बीच सैंपलिंग की रफ्तार बेहद धीमी हो गई। स्क्रीनिंग की संख्या भी घट गई। नवगछिया, भागलपुर रेलवे स्टेशन और सभी प्रखंड के मुख्य क्वारेंटाइन सेंटरों के अलावा सभी 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्राें और सदर अस्पताल में स्क्रीनिंग की सुविधा है। सबसे बड़े अस्पताल मायागंज में इसे बंद कर दिया गया। जानकारों की माने तो ऐसे में लक्षणों के आधार पर सैंपलिंग तो हो सकती है, लेकिन पूरी तरह कोरोना फ्री जिले के लिए हर प्रवासी की सैंपलिंग जरूरी है। ऐसा न होने पर आए दिन मरीजों के सामने आने की रफ्तार बढ़ती रहेगी।
स्क्रीनिंग सेंटर पर खतरा
सदर अस्पताल समेत जिले के सभी 16 पीएचसी के फ्लू कॉर्नर पर हाल बेहाल है। यहां इलाज के लिए आने वाले अाेपीडी व इंडाेर में सभी मरीजों की स्क्रीनिंग अनिवार्य है। इसके बाद ही इलाज होता है। लेकिन एक ही डॉक्टर एक पाली में तैनात हैं। फ्लू कॉर्नर पर भी एक ही मौजूद हैं। ऐसे में प्रवासियों के साथ सामान्य मरीज भी एक ही कतार में खड़े हो रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार है। इससे संक्रमण की आशंका बढ रही है।

रैंडम सैंपलिंग की व्यवस्था फेल
बाजार, सब्जी मंडी व अन्य भीड़ भरे इलाकों में लोगों, दुकानदारों के रैंडम सैंपल की योजना बनी। लेकिन एक ही दिन लोहिया पुल के पास से चार सब्जी दुकानदारों के सैंपल लिए। उनकी रिपोर्ट निगेटिव आते ही जिम्मेदार इस सैंपलिंग को भुला बैठे। इसके बाद कहीं रैंडम सैंपल नहीं लिए।

जांच की रफ्तार धीमी
मायागंज अस्पताल की कोरोना जांच लैब और पटना लैब में सैंपल जांच के लिए भेजे जाते हैं। यहां सिर्फ एक दिन में 35 मरीजों की जांच की क्षमता है। ट्रू नेट मशीन से भी 30-35 की जांच होती है। सीबी नेट और ट्रू नेट दोनों ही मशीनों से महज एक दिन में सिर्फ 60 मरीजों की ही जांच हो सकती है। ऐसे में क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे 17202 मरीजों की जांच में ही विभाग को 286 दिन लग जाएंगे।



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सदर अस्पताल के फ्लू सेंटर पर सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार, एक ही कतार में खड़े हैं प्रवासी और सामान्य मरीज, बढ़ रहा है संक्रमण का खतरा।


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