भटके मन को एक जगह केन्द्रित करके बांध लेने का नाम है योग : जीयर स्वामी जी महाराज
सासाराम प्रखंड के कंचनपुर गांव में इन दनों प्रवास कर रहे श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के शिष्य पूज्य जीयर स्वामी जी महाराज के दर्शन के लिए शुक्रवार को साल के पहले दिन श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ा। कंचनपुर यज्ञ स्थल पहुंचे हजारों भक्तों ने पूज्य जीयर स्वामी जी के दर्शन के साथ अग्रेजी नववर्ष का आगाज किया। श्रद्धालुओं ने स्वामी जी का दर्शन कर आर्शीवाद प्राप्त किया। नए साल के शुभारंभ के मौके पर स्वामी जी के दर्शन के लिए बिहार विभिन्न जिलों, उत्तर प्रदेश के चंदौली, बनारस, जमनिया, बलिया, देवरिया, गाजीपुर, इलाहाबाद जिल के अलावे झारखंड राज्य सहित बिहार के समावर्ती राज्यों के भक्त भारी संख्या में पहुंचे थे। दूसरे दिन प्रवचन करते हुए जीयर स्वामी जी ने कहा कि शुकदेवजी महाराज से राजा परीक्षित ने पूछा की ये हमारे भावना आएंगे कैसे। तो सुकदेव जी महाराज ने कहा कि इसके लिए योग को करना पडेगा। तो फिर प्रश्न किया कि योग कितने हैं किसे कहते हैं। योग केवल इतना ही नही की सांस को लेना फिर छोड़ना। यह केवल स्वास्थ्य लाभ के लिए अच्छा है। लेकिन इतने से हम योग के अधिकारी हो जाएंगे यह बात नही है। योग का अर्थ है कि हमारा मन, चित बुद्धि कहीं भटक गया है, कहीं अटक गया है, उसको चारो तरफ से केन्द्रित करके, पकड़ करके, समझा करके और एक जगह ला करके बांध लेना इसी का नाम योग है।
चित की चंचलता को रोका नही जा सकता : स्वामी जी महाराज ने बताया कि चित की चंचलता को रोका नही जा सकता है। मोड़ा जा सकता है। इसको दुसरे जगह ट्रांसफर किया जा सकता है। प्रतिस्थापित किया जा सकता है। जो चीज नही रूकने वाला है उसे कैसे आप रोक सकते हैं। इसलिए मन को लगाना है तो वहां लगाइए जिसने पुरे संसार को बनाया है। उन्ही में अपनी चित् की चंचलता को लगा दीजिए। और जब जब मन करता है कुछ गुनगुनाने की तो मुरली वाले की नाम को गाइए। घुमने की इच्छा हो तो क्लब में मत जाइए।
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