पुनौराधाम : जहां हल चलाने के दौरान कलश से प्रकट हुई थी माता सीता
पुनौरा धाम मंदिर सीतामढ़ी शहर से महज डेढ़ किमी की दूरी पर स्थित है ऐतिहासिक व पौराणिक पुनौरा धाम मंदिर। इसे माता जानकी की जन्मस्थली के रूप में ख्याति प्राप्त है। इस कारण संसार भर में यह हिन्दू धर्मावलंबी भक्तों के लिए आस्था का केन्द्र है। पर्यटन विभाग की ओर से यहां विकास के कई कार्य कराए जा रहे हैं। बिहार के पर्यटन मंत्री जीवेश मिश्रा इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्राथमिकता के तौर पर विकास कार्य कराए जाने की बात कह चुके हैं।
कहा जाता है कि त्रेता युग में जब अकाल पड़ा था, तो राजा जनक ने हलेष्टी यज्ञ कर हल चलाना शुरू किया था। इसी दौरान हल की सीत से टकराकर घड़ा फूटा और उससे एक बच्ची मिली। बारिश हो रही थी। यहां पुण्डरीक ऋषि की कुटिया थी। राजा ने इसी कुटिया में रखा। जो कालांतर में सीतामढ़ी के नाम से जाना जाने लगा। अब यह पुनौरा धाम सीतामढ़ी के नाम से जाना जाता है। जहां दूर-दूर से दर्शनार्थी आते है।
धार्मिक महत्ता : सीतामढ़ी और उसके आसपास के क्षेत्रों में इनसे जुड़े कई खास महत्व के स्थान
सीतामढ़ी से 35 किलाेमीटर दूर पूरब में राजा जनकी की राजधानी जनकपुर है। राष्ट्रीय राजमार्ग 104 से भारत-नेपाल सीमा पर भिट्ठामोड़ जाकर जनकपुर पहुंचा जाता है। राजा जनक की इस नगरी जनकपुर में शिवधनुष भंग कर स्वयंवर में भगवान राम ने जानकी से विवाह किया था।
हलेश्वर स्थान : राजा जनक ने यहीं पर आकर हलेष्टि यज्ञ किया था। यज्ञ के साथ ही हल चलाना शुरू किया और घनघोर बारिश हुई थी। इस स्थान पर आज भी भगवान शिव की पवित्र लिंग स्थापित है।
पंथपाकड़ : विवाह के बाद इसी रास्ते से सीता को अयोध्या लाया जा रहा था। पहला पड़ाव पथपाकड़ में हुआ। अगले दिन सुबह में सीता दतवन कर जो अवशेष फेंक दी थी, उसी से विशाल पाकड़ का पेड़ निकला।
तप स्थली : इनमें चकऋषि, लक्ष्मण ऋषि, पौण्डरिक ऋषि, कपिल ऋषि की कुटिया हुआ करती थी। चकऋषि के नाम पर चकमहिला, पौण्डरिक ऋषि के नाम पर पुनौरा आदि स्थान हैं।
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