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गौशाले के विकास के लिए जनप्रतिनिधियाें और अफसरों ने कई बार दिया आश्वासन, हुआ कुछ नहीं

गौशाले के विकास के लिए जनप्रतिनिधियाें और अफसरों ने कई बार दिया आश्वासन, हुआ कुछ नहीं

जिले की इकलौता गौशाले की हालत खराब है। ठंड में गाय कांपती रहती है। कनकनी से बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। गौशाला में गायों के लिए हरा चारा व दवाएं भी नहीं हैं। हालत यह है कि बीमार गायों को सर्दी से बचाने तक की व्यवस्था नहीं की गई है। वहां बहुत सी गायें फर्श पर पड़ी हुई हैं। छोटे बछड़ों को भी गायों के साथ एक ही बाड़े में बंद किया गया था। गौशाला को 1917 में बना कर तैयार किया गया था। नौ एकड़ जमीन में बनाए गए गौशाला अब तक विकास की राह ढूंढ रहा है। स्थापना के बाद एसडीओ को अध्यक्ष पद के लिए चुना गया था। जिसकी देख रेख करने व बेहतर व्यवस्था की जिम्मेदारी अध्यक्ष का होता है। लेकिन जिले का इकलौता गौशाला जर्जर की स्थिति में है। गाय को रहने तक के लिए कोई बेहतर कमरा या चबूतरा नहीं है। गाय खुले में ही घूमती रहती है। गर्मी के मौसम में तो इधर-उधर छांव में बैठ कर गाय का गुजर बसर हो जाता है। लेकिन बरसात व सर्दी के मौसम में कोई बेजुबान का दर्द नहीं समझ पाता है। अधिकारी व जनप्रतिनिधियों के द्वारा आश्वासन दिया जाता है। देश मे गौ रक्षा की बात करने वाले अपने ही जिले की गौ रक्षा नहीं कर पा रहे हैं।

केवल चर्चा तक ही सिमट गया मॉल
2014 में गौशाला में मॉल बनाने की चर्चाएं जोरों पर थंी। लेकिन विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल ने इसका विरोध कर दिया। विहिप के नगर अध्यक्ष मुकेश कुमार से जब गौशाला के विकास पर पूछा गया तो बताया कि गौशाला में जितने भी सदस्य या अध्यक्ष हैं सब लूटपाट करते हैं। जो पैसा शहर से चंदा के लिए जाता है उसे सदस्यों ने अपना हक समझ कर घरंलू उपयोग कर लिया है। जिसका विहिप बार बार विरोध किया लेकिन अध्यक्ष के द्वारा कोई कारवाई नही की गई है।

बाढ़ से 300 टन भूसा हो गया खराब
पिछले कुछ महीनों पहले बरसात के दिनों में गौशाला के अंदर बाढ़ जैसी स्थिति हो गई थी। इसमंे तीन सौ टन भूसा खराब हो गया। इस वजह से गाय को भोजन भी समय से नहीं मिल पा रहा है। गाय को रहने के लिए बनाए गए घर के चारों तरफ की दीवार गिर चुकी है। छत से प्लास्टर झड़ता है। नौ अध्यक्ष व दो सौ पचास सदस्य होने के बाद भी गौशाले की स्थिति बदतर हो गई है। स्थापना के साथ ही एक कुआं भी बनाया गया था। वह भी छह साल से बंद पड़ा है।

दो साल से एक भी डाॅक्टर नहीं

गौशाला में कहने को तो 37 गायें हैं, लेकिन इनकी देखभाल व इलाज के लिए दो साल से कोई पशु चिकित्सक नहीं पहुंचा। सप्ताह में एकबार गायों के परीक्षण का प्रावधान है। इलाज के अभाव में दर्जनों गायें बीमार पड़ी हैं। इन्हें भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा है। बावजूद इस ओर न तो अधिकारियों का ध्यान है और न ही जनप्रतिनिधियों का।

गौरक्षा की बात करनेवाले गौसेवा से मोड़ रहे मुंह
सचिव श्याम नगरिया ने बताया कि गौशाला में किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं जाता है। कुछ संगठनों के द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि पैसों का गलत दुरुपयोग हो रहा है तो जांच की मांग करता हूं। जरूरत पड़ने पर इस्तीफा भी दे सकता हूं। गौशाला के लिए कोई बेहतर पहल अब तक किसी के द्वारा नहीं की गयी है। जदयू राज्य परिषद सदस्य एवं सारण प्रमंडल मीडिया प्रभारी निकेश चन्द्र तिवारी ने बताया कि गौशाला में हम सब की मां रहती है। पिछले दशकों से सुनता आ रहा हूं कि अब गौशाला का विकास होगा। लेकिन सिर्फ झूठी बातों से जनता को भरमाया जा रहा है। स्थानीय सांसद, विधायक व अध्यक्ष पद पर रह रहे अधिकारियों को निष्पक्षता से कार्य को करना चाहिए। इससे हमारी माताएं ठंड में राहत के साथ जी सके। गौ रक्षा की बात करने वाले ही गौसेवा करने से मुह मोड़ रहे हैं।

मंदिर भी हो गया है जर्जर
स्थापना के साथ ही प्रवेश द्वार पर राधे कृष्ण का मन्दिर व पीछे में शिव जी की मन्दिर की भी स्थापना हुई थी। लेकिन आज हालत ऐसा है कि मंदिर में पूजा करने के लिए भी कोई नहीं जाता क्योंकि मन्दिर की दीवार व छत कब गिर जाए किसी को नहीं पता। कभी भी कोई घटना घटित हो सकती है। बनाए गए कार्यालय की ईंट ने भी अपना साथ छोड़ दिया है। पूरी इमारत कब गिर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता।

लाइट खराब, शाम होते ही छा जाता है अंधेरा
गौशाले की देख-रेख में तैनात मैनेजर कमलेश सिंह ने बताया की कहीं भी लाइट की व्यवस्था नहीं है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। गाय भी अंधेरे में इधर उधर गड्‌ढे में गिरकर घायल हो जाती है। नगर परिषद की तरफ से दो लाइट लगाई गई थी जो कि एक साल से खराब पड़ी है। इसे बदला नहीं गया है।

जल्द गौशाले के लिए बैठक की जाएगी। इसमें विकास की रूपरेखा तैयार की जाएगी। सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हो जाएगी।
राम बाबू बैठा, गौशाला अध्यक्ष सह एसडीओ।



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Public representatives and officials have given assurances many times for the development of cowshed, nothing happened


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