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न नियमों की चिंता और न ही जान की फिक्र

न नियमों की चिंता और न ही जान की फिक्र

रेल नियमों को तोड़ना अब लोगों का शगल बनते जा रहा है। रेल प्रशासन की उदासीनता से ऐसा करने वालों के हौसलें भी बढ़ने लगे है। पहले लोग बंद क्रॉसिंग को ही पार करते थे लेकिन अब तो खड़ी ट्रेनों के नीचे से गुजरने में भी लोग गुरेज नहीं कर रहे है। तस्वीर डुमरांव रेलवे स्टेशन के अप लाइन की है। सुबह साढ़े दस बजे अप लाइन में हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन खड़ी थी।

इस दौरान टेक्सटाईल गेट के सामने एक युवक ट्रैक में न सिर्फ अपनी साइकिल लेकर पहुंचा बल्कि उसे खड़ी ट्रेन के नीचे से साइकिल निकालने का प्रयास करने लगा। कई बार के प्रयास में वह सफल भी हुआ। लेकिन इस प्रयास में यदि ट्रेन चल पड़ती तो जान भी जा सकती थी। खास यह कि उस युवक को ऐसा करने से रोकने के लिए रेल प्रशासन भी आगे नहीं आया।



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Neither worry about rules nor worry about life


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