माले व राजद के बीच असली जिच पांच सीटों पर, यहां राजद के सीटिंग एमएलए जिसे वह छोड़ने को तैयार नहीं, तो माले ने गठबंधन छोड़ा
महागठबंधन से माले ने ज्यादा नहीं, 20 सीटें मांगी थीं। बात बनी नहीं तो 30 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। दरअसल पेच पांच सीटों पर फंसा जिसे माले किसी कीमत पर लेना चाहती है और राजद इन्हें इस बिना पर छोड़ने को तैयार नहीं हुआ कि सभी सीटों पर उसके सीटिंग विधायक हैं। माले के लिए परेशानी यह है कि राजद की जिन सीटिंग सीटों पर वह दावा ठोंक रही है।
वहां से वह अपने दमदार चेहरों को उतारना चाहती है, इनमें कुछ नए भी हैं। जगदीशपुर या संदेश, मसौढ़ी या फुलवारीशरीफ, घोसी या ओबरा में से कोई एक सीट के अलावा पार्टी काराकाट सीट अपने पूर्व विधायक अरुण कुमार और पालीगंज सीट जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे आइसा के राष्ट्रीय महासचिव संदीप सौरभ के लिए चाहती है।
संदेश सीट से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके राजू यादव दावेदार हैं, संदेश पर बात नहीं बनी तो वह जगदीशपुर से भी चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन समस्या है कि जगदीशपुर से राजद के रामविशुन सिंह लोहिया और संदेश से अरुण यादव विधायक हैं। अरुण फरार चल रहे हैं उनके स्थान पर उनकी पत्नी या भाई खड़े हो सकते हैं। हिलसा और इस्लामपुर सीट की स्थिति है कि हिलसा में राजद के सीटिंग विधायक शक्ति सिंह यादव है लेकिन इस्लामपुर में ऐसी कोई बात नहीं है।
फुलवारी की सीट थी तो जदयू की जहां से श्याम रजक जीते थे, लेकिन अब वह राजद में हैं। मसौढ़ी से राजद की रेखा देवी पिछला चुनाव जीती हैं। लिहाजा इन दोनों सीटों को भी राजद भाकपा-माले के लिए छोड़ने को राजी नहीं हुआ। पालीगंज से जीते राजद के जयवर्द्धन यादव ने पाला बदल लिया है और जदयू में शामिल हो गए हैं।
यहां राजद का चेहरा कौन होगा, अभी तय होना है। ओबरा की सीट माले पूर्व विधायक राजाराम सिंह के लिए चाहती है जबकि यहां से विरेन्द्र सिन्हा हैं। काराकाट की सीट के दावेदार भाकपा-माले के पूर्व विधायक अरुण कुमार हैं जबकि राजद के संजय कुमार सिंह की यह सीटिंग सीट है।
माले की घोषित 30 सीटों में 13 ऐसी जहां पार्टी कभी न कभी जीती
जगदीशपुर (1990), संदेश (1995), आरा (1995), दरौली (1995,2005 फ, 2005 अ.,2015), मैरवां (1995, 2000, 2005 फरवरी), बलरामपुर पहले बारसोई (2000, 2005, 2015), पालीगंज (2005), मसौढ़ी व हिसला (1990, तब पार्टी का नाम आईपीएफ था) काराकाट (1995) ओबरा (1995, 2000), तरारी ( 2015)
17 सीटें कभी नहीं जीती, पर यहां उतारेगी उम्मीदवार : चैनपुर, शेरघाटी, बेनीपट्टी, गायघाट, औराई, वारिसनगर, हायाघाट, इस्लामपुर, जहानाबाद, कुर्था, भोरे, सिकटा, घोसी, अरवल, फुलवारीशरीफ, रघुनाथपुर और अगियांव
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