डॉक्टरों ने जन्म से जुड़े दो बच्चों को ऑपरेशन कर अलग किया; एक स्वस्थ, दूसरे की मौत
आईजीआईएमएस के डाॅक्टराें ने जन्म से ही जुड़े तीन माह के दाे बच्चाें काे अलग कर उनमें से एक की जान बचा दी। एक स्वस्थ बच्चे से दूसरा पोषित हो रहा था। यानी, दूसरा बच्चा परजीवी था और इसके चलते स्वस्थ बच्चे पर खतरा बढ़ता जा रहा था। स्वस्थ बच्चा ही दूध पी रहा था।
वह दूसरे को भोजन (संपोषित) दे रहा था। वह अब पूरी तरह से स्वस्थ है। बच्चे समस्तीपुर के हैं। बीते बुधवार को उनके परिजन उन्हें यहां लेकर आए थे। शनिवार को सर्जरी कर दाेनाें काे अलग कर दिया गया। विभाग के हेड डॉ. विजयेंद्र कुमार के नेतृत्व में डाॅक्टराें की टीम ने सर्जरी की।
टिविलिंग एनोमलीज की वजह से 5 लाख बच्चों में ऐसा एक केस
ऐसी स्थिति टिविलिंग एनोमलीज के कारण होती है। इसमें जुड़वा बच्चाें में से एक दूसरे पर परजीव (भोजन के लिए निर्भर रहना) हो जाता है। इसे पारासाइटिक टि्वंस कहा जाता है। इसमें एक ही बच्चा जीवित रहता है। संस्थान में पहली बार इस तरह का केस आया था। पांच लाख में एक बच्चा ऐसा पैदा हो सकता है। यदि गर्भावस्था के दौरान महिला ने सोनोग्राफी कराई होती ताे गड़बड़ी समय रहते पता चल जाती।
इसलिए गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति पता करने के लिए सोनोग्राफी जरूरी होती है। इस महिला ने सोनोग्राफी नहीं कराई। स्वस्थ बच्चे से जो बच्चा जुड़ा था। उसका मुंह-कान तो बना था। लेकिन वह फीड नहीं कर रहा था। पर उसका शरीर विकसित हो रहा था। वह स्वस्थ बच्चे पर निर्भर था। -डॉ. विनीत ठाकुर, पेडिएट्रिक सर्जरी विभाग (जैसा भास्कर को बताया)
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की टीम
डॉ. संदीप, डॉ. रामधनी, डॉ. रामजी, डॉ. दिगंबर, डॉ. जहीर, डॉ. विनीत, डॉ. विनोद , डॉ. शशांक, डॉ. असजद, डॉ. सुजीत शामिल थे।
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