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गर्दन तोड़ बीमारी से धान के उत्पादन पर आंशिक असर, किसानों ने शुरू की कटाई

गर्दन तोड़ बीमारी से धान के उत्पादन पर आंशिक असर, किसानों ने शुरू की कटाई

खेतों में धान की कटाई के साथ कृषि उपज मंडी में धान की ट्राॅलियां पहुंचना शुरू हो गई हैं। इस बार बासमती धान का उत्पादन मिलाजुला रहा है। जिन खेतों पर बीमारी ने अटैक किया वहां उत्पादन में प्रति एकड़ चार से पांच क्विंटल की गिरावट आ रही है।

विश्वसनीय और किफायती मानी जाने वाली क्रांति धान की सिल्की नामक प्रजाति लगाने वाले किसानों को इस बार अच्छा उत्पादन मिला है। क्षेत्र में धान की कटाई और थ्रेसिंग का काम शुरू हो गया है। बासमती धान के वे खेत जहां गर्दन तोड़ बीमारी का प्रकोप हुआ था वहां पैदावार पर असर पड़ा है।

बीमारी से सुरक्षित रह गए बासमती धान के खेतों में प्रति एकड़ 18 से 20 क्विंटल के आसपास उत्पादन होता नजर आ रहा है। जिन खेतों पर गर्दन तोड़ बीमारी का प्रकोप हुआ था वहां प्रति एकड़ 14 से 16 क्विंटल के आसपास बासमती धान की पैदावार समझ में आ रही है।

सिल्की धान ने दिया अच्छा उत्पादन
इस बार सिल्की धान लगाने वाले किसान हैं जिनके यहां प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल का एवरेज उत्पादन में निकल रहा है। कृषक गुलाब सिंह बैंकर ने बताया कि समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली क्रांति धान की ही किस्म सिल्की की पैदावारी किसानों के लिए अच्छी साबित हो रही है।

बैंकर ने कहा सिल्की धान में एक तो बीमारी का प्रकोप नहीं हुआ दूसरी बात इसमें लागत कम आई है और इसकी पैदावार भी प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल के आसपास है हालांकि क्षेत्र के अधिकांश किसान बासमती धान लगाना पसंद करते हैं, इसके बाद भी अनेक किसानों ने सिल्की धाम लगाई है।



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Neck break disease has partial effect on paddy production, farmers start harvesting


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