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शराब मामले में दागी थानेदार को एसएसपी ने हटाकर पुलिस लाइन भेजा, बोले-पुलिस की मंशा गलत नहीं थी

शराब मामले में दागी थानेदार को एसएसपी ने हटाकर पुलिस लाइन भेजा, बोले-पुलिस की मंशा गलत नहीं थी

शराब के नशे में हिरासत में लिए गए डॉ. मनीष की अल्कोहल टेस्ट 7 घंटे बाद कराए जाने के मामले में बरारी पुलिस की संदिग्ध भूमिका की लीपापोती हो गई है। ट्रैफिक डीएसपी आरके झा को मामले की जांच सौंपी गई थी। उन्होंने जांच कर अपनी रिपोर्ट एसएसपी को सौंप दी, जिसके आधार पर बरारी थानेदार नवनीश कुमार को अभयदान मिल गया।

एसएसपी ने बरारी थानेदार को सस्पेंड नहीं कर देर शाम सिर्फ उन्हें बरारी से हटाकर पुलिस लाइन में योगदान करने का निर्देश दिया। साथ ही दारोगा प्रमोद साह को बरारी का नया थानेदार बना दिया। यानी अब अल्कोहल टेस्ट कराने में देरी करने वाले थानेदार या जिम्मेदार पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी। एक प्रकार से एसएसपी ने नवनीश कुमार को कार्रवाई से बचा लिया है।

क्योंकि शराब मामले में किसी भी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं है। उधर, ट्रैफिक डीएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी आशीष भारती ने भी यह साफ कर दिया है कि अल्कोहल टेस्ट कराने में देरी के पीछे बरारी पुलिस की मंशा गलत नहीं थी। बल्कि हिरासत में लिये जाने के बाद बरारी पुलिस अल्कोहल टेस्ट कराने के लिए मायागंज अस्पताल व आबकारी गोदाम भटकती रही, लेकिन दोनों स्थानों पर टेस्ट नहीं हुए।

तब आखिर में तिलकामांझी थाने में टेस्ट हुआ, जिसमें शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई। इन दोनों स्थानों पर पुलिस का काफी समय बीत गया। आखिर में दोपहर 3.12 बजे तिलकामांझी थाने में जांच हुई तो उसमें शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई। एसएसपी ने बताया कि सभी थानों में ब्रेथ एनालाइजर उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण दूसरे थानों में जाकर अल्कोहल टेस्ट करानी पड़ती है।
पहली बार अल्कोहल की जांच काे पुलिस काे भटकना पड़ा
शराबखोरी से संबंधित शायद यह पहला मामला है, जिसमें शराबी की जांच कराने लिए पुलिस को दर-दर भटकना पड़ा। अगर शहरी इलाके में कोई शराब के नशे में पकड़ा जाता है तो उसकी जांच अमूमन कोतवाली, इशाकचक या जीआरपी में कराई जाती है। लेकिन डॉ. मनीष के मामले में ऐसा नहीं हुआ। मायागंज अस्पताल ले जाने का कोई तुक नहीं था, क्योंकि वहां ब्रेथ एनालाइजर नहीं है।

हां, ब्लड लेकर वहां जांच कराई जा सकती थी, लेकिन पुलिस ने उसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। उत्पाद विभाग में कभी पुलिसवाले जाकर शराबी की जांच कराए हों। जबकि बरारी थाना के पास में तिलकामांझी थाना है। अगर बरारी पुलिस की मंशा साफ होती ताे डॉ. मनीष को लेकर भटकने के बजाय उन्हें कोतवाली या तिलकामांझी थाना ले जाया जाता, जहां ब्रेथ एनालाइजर से मिनटों में जांच हो जाती है और रिपोर्ट भी मिल जाती है।
डॉ. मनीष काे लिया था हिरासत में
डॉ. मनीष पर शराब के नशे में पीजी हॉस्टल के गार्ड अविनाश के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। घटना रात 12 की थी। बरारी पुलिस ने उस समय मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सुबह जब मामला तूल पकड़ा तो एएसपी भरत सोनी अस्पताल पहुंचे और करीब 8 बजे सुबह डॉ. मनीष को हिरासत में लिया बरारी थाने पहुंचा दिया। 7 घंटे बाद दोपहर 3.12 बजे उसकी अल्कोहल टेस्ट कराई गई, जिसमें शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई।



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Tainted SHO in liquor case, SSP removed and sent to police line, said - Police intention was not wrong


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