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अस्पताल में अब भी ओपीडी व प्लांड सर्जरी बंद, नतीजा पिछले साल की तुलना में इस बार 68% कम आए मरीज

अस्पताल में अब भी ओपीडी व प्लांड सर्जरी बंद, नतीजा पिछले साल की तुलना में इस बार 68% कम आए मरीज

काेराेनाकाल के छह माह बीतने काे है। लेकिन काेशी व पूर्व बिहार के सबसे बड़े मायागंज अस्पताल की व्यवस्था अब तक सामान्य नहीं हाे पाई है। ओपीडी और प्लांड सर्जरी 22 मार्च से ही बंद है। केवल इमरजेंसी मरीजाें का ही इलाज हाे पा रहा है। यही वजह है कि 933 बेड के अस्पताल में फिलहाल 294 मरीज ही भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

इनमें भी केवल 256 सामान्य और 38 काेराेना के मरीज हैं। पिछले साल से तुलना में अप्रैल से अगस्त के बीच इस बार 68 फीसदी मरीज कम आए हैं। वर्ष 2019 में अप्रैल से अगस्त तक भर्ती मरीजाें का आंकड़ा 23501 था। लेकिन इस बार अप्रैल से अगस्त तक 7545 मरीज ही भर्ती हुए। जबकि पिछले साल की स्थिति यह थी कि अगस्त और सितंबर में इंडाेर के सभी बेड भरे हाेते थे और जमीन पर भी मरीजाें काे बेड लगाकर इलाज करना पड़ता था।

जानकार बताते हैं कि ओपीडी व प्लांड सर्जरी बंद हाेने, काेराेना के लिए डेडिकेटेड अस्पताल बनाने और काेराेना के डर से मरीजाें की संख्या कम हुई है। अस्पताल के कई डाॅक्टर और नर्स भी पाॅजिटिव निकल चुके हैं, जिससे मरीज वहां इलाज कराने आने से कतराते हैं। वहीं दूसरी स्थिति यह है कि काेराेना के डर से मरीज मायागंज अस्पताल आने से हिचकिचा रहे हैं।

दुकानदार से बिना पर्चे के दवा खरीद रहे हैं लोग

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसाेसिएशन के संगठन सचिव प्रदीप जैन ने बताया कि रिटेल दवा दुकानाें में बिना डाॅक्टराें के पर्चा के दवा खरीदने की रफ्तार काेराेना के बाद बढ़ी है। अधिकतर लाेग सर्दी-खांसी व बुखार, पेट खराब हाेने की दवा ताे खुद ही लेते ही थे। लेकिन अब मलेरिया, डेंगू व काेराेना हाेने पर भी लाेग अपने मन से दवा लेकर खा रहे हैं। दुकानदाराें की मजबूरी है कि वह दवा नहीं दे, ताे उनके साथ सामाजिक परेशानी आती है।

मायागंज अस्पताल में मरीजाें की संख्या कम हाेने के पीछे ये हैं पांच मुख्य कारण

1. ओपीडी 22 मार्च के बाद से बंद
2.प्लांड सर्जरी बंद- काेराेना के चलते अस्पताल में प्लांड सर्जरी बंद। केवल इमरजेंसी मरीजाें व गर्भवतियाें की ही सर्जरी हाेती है।
3.डेडिकेटेड काेविड हाॅस्पिटल घाेषित हाेने के बाद से यहां कुछ माह तक इमरजेंसी केस का इलाज भी बंद हाे गया था।
4.जब काेराेना मरीजाें से अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड व मेडिसीन इंडाेर व आईसीयू फुल
5. इमरजेंसी में सभी तरह के मरीजाें की भर्ती की जाने लगी, ताे काेराेना के डर से लाेग कम आने लगे।

मरीज अपनी मर्जी से नहीं, डाॅक्टराें की सलाह के बाद ही खाएं दवा

अपनी मर्जी या दुकानदार से पूछ कर दवा खाने से साइड इफेक्ट भी हाेते हैं। इससे मरीज काे खतरा हाेता है। दुकानदार दवा का डाेज मरीज की उम्र और बीमारी देखने के बाद तय हाेते हैं। इसलिए डाॅक्टराें की सलाह लेना चाहिए।

- डाॅ. हेमशंकर शर्मा, फिजिशियन



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OPD and planned surgery still closed in the hospital, the result was 68% less patients than last year


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