कोरोना काल में दशहरा पर रावण मरेगा या नहीं इस पर असमंजस कायम, अनुमति मिली भी तो 1000 लोग ही हो सकेंगे शामिल
(आलोक कुमार) विजयादशमी के दिन गांधी मैदान में होने वाले रावणवध समारोह के लिए प्रशासन ने अबतक अनुमति नहीं दी है। अगर अनुमति नहीं मिली तो 12 साल के बाद रावणवध की परंपरा टूटेगी। इससे पहले 2008 में कोसी बाढ़ त्रासदी के कारण आयोजन रद्द कर दिया गया था। ज्यादा संभावना है कि रावणवध समारोह के साथ रामलीला भी वर्चुअल होगा।
श्री दशहरा कमिटी ट्रस्ट ने जिला प्रशासन और प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र लिख कर आयोजन के संदर्भ में मार्गदर्शन मांगा है। अध्यक्ष कमल नोपानी ने बताया कि पत्र दिए हुए 10 दिन से अधिक हाे गए पर अभी तक जवाब नहीं आया है। सोमवार को डीएम और कमिश्नर से मिलने की कोशिश की जाएगी। उसके बाद ही तय होगा कि इसबार आयोजन होगा या नहीं और अगर हाेगा ताे उसका स्वरूप क्या होगा। पिछले साल भी पटना में भारी बारिश और कई मोहल्लों में भीषण जलजमाव के कारण समारोह फीका रहा था।
1955 से हाे रहा है रावणवध समारोह
आजादी के बाद 1955 में पहली बार पटना के गांधी मैदान में रावणवध समारोह शुरू हुआ। आजादी से पहले पंजाब से पटना सिटी आए गांधी परिवार के लोगों ने इसकी शुरुआत की। बख्शी राम गांधी और राधाकृष्ण मल्होत्रा ने स्थानीय लोगों के सहयोग से रावण वध समारोह की शुरुआत की। पहले छोटे पैमाने पर समारोह हुआ। लेकिन, जैसे-जैसे समय बीतता गया यह समारोह व्यापक होता गया। अब ताे दो से तीन लाख लोग रावणवध देखने जुटते हैं। पांच साल पहले रावणवध समारोह के दौरान भगदड़ मचने से 40 से अधिक लोगाें की माैत हाे गई थी। शहर के अलावा आसपास के गांवों से भी लोग गांधी मैदान पहुंचते हैं।
पुतला बनाने वाले ने कहा-हम तैयार हैं
हर साल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बनाने वाले गया के कारीगर मो. जफर ने बताया कि उनकी टीम पटना आने को तैयार है। पिछले साल 2.51 लाख रुपए मिले थे। इस काम में एक महीने का समय लगता है।
तीन बार टूट चुकी है आयोजन की परंपरा
श्री दशहरा कमेटी ट्रस्ट के संरक्षक टीआर गांधी के अनुसार 1962 में भारत-चीन युद्ध के कारण और 1975 में भीषण बाढ़ के कारण रावणवध समारोह नहीं हुआ था। इसके बाद वर्ष 2008 में कोसी बाढ़ त्रासदी के कारण भी आयोजन रद्द कर दिया गया था। यह चौथा मौका है जब आयोजन पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
25 तक अनुमति नहीं मिली तो वर्चुअल समारोह भी मुश्किल
रावण के साथ मेघनाथ व कुंभकर्ण का पुतला बनता है। रावण की ऊंचाई 70, कुंभकर्ण के पुतले की 65 और मेघनाथ के पुतले की ऊंचाई 60 फीट रखी जाती है। पुतला बनाने का काम कम से कम आयोजन से एक महीना पहले शुरू हो जाता है, जो अब तक शुरू नहीं हो सका है। जबकि 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो जाएगी और 27 अक्टूबर को विजयादशमी है। आयोजकों का कहना है कि 25 सितंबर तक स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं मिला तो आयोजन नहीं हो पाएगा।
15 अगस्त की तरह आयोजन को तैयार है दशहरा कमेटी
ट्रस्ट के सचिव अरुण कुमार ने बताया कि जैसे गांधी मैदान में सीमित लोगों के बीच स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन हुआ, उसी तरह रावणवध समारोह भी हो सकता है। अगर अनुमति मिली तो प्लान के मुताबिक करीब 1000 लोग समारोह के दौरान गांधी मैदान में रहेंगे। इसमें इंट्री गेट पर ही थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था रहेगी। समारोह का लोकल समाचार चैनलों के जरिए और यूट्यूब लिंक के जरिए लाइव कराया जा सकता है।
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