महदह बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में घुसे 7 हथियार बंद अपराधी, 4.61 लाख रुपये लूटे
मुफस्सिल थाना के महदह स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में मंगलवार को लुटेरों ने चार लाख 56 हजार रुपये लूट लिए। घटना को सात नकाबपोश लुटेरों ने अंजाम दिया। घटना दोपहर एक बजे के बाद की है, जब बैंक में भीड़ कम होती है। अपराधियों ने पहले बाहर खड़े चपरासी को पीटा, फिर बैंक में घुसकर बैंक कर्मियों को बंधक बनाया और कैश लेकर रफूचक्कर हो गए। बड़ी बात तो यह है कि अपराधियों ने लूट की पूरी वारदात एक मिनट के अंदर अंजाम दे दिया।
जिससे साफ जाहिर होता है कि वारदात को अंजाम देने के लिए लुटेरे काफी दिनों से बैंक व कर्मियों की रेकी में लगे हुए थे। हालांकि, घटना के बाद एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा, एसडीपीओ सतीश कुमार, मुफस्सिल थाना मुकेश कुमार व इटाढ़ी थानाध्यक्ष आलोक कुमार जांच को पहुंचे। एसपी स्वयं ने बैंक के अधिकारियों से पूछताछ की और कैशियर के बयान पर एफआईआर दर्ज की।
उसके बाद पुलिस अधिकारियों ने एक-एक कर बैंक के अधिकारियों व शाखा में आये लोगों से पूछताछ की। एसपी ने बैंक में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला। जिसके बाद अपराधियों से जुड़ी जानकारी आसपास के सभी थानों में भेज कर वाहन जांच और छापेमारी शुरू करने का निर्देश दिया।
बैंक में घुसते ही कैशियर को बनाया बंधक
पूछताछ के दौरान बैंक के कैशियर शिव जी चौबे ने बताया कि ब्रांंच मैनेजर की तबियत खराब होने के कारण वह मंगलवार को नहीं आये। ग्रामीण शाखा होने की वजह से दोपहर बाद भीड़ कम हो जाती हैं। इस बीच दोपहर एक बजे लाइट चली गयी। तब चपरासी धर्मेंद्र कुमार नीचे रखे जेनरेटर चालू करने गया। लेकिन, नीचे घात लगए अपराधियों ने उसे पकड़ लिया और उसे काफी पीटा।
उसके बाद छह की संख्या में नकाबपोश अपराधी घुसे और हथियार लहराने लगे। इनमें से दो अपराधियों ने सबसे पहले कैशियर को बंधक बनाया। फिर बाकियों ने अन्य कर्मियों व ग्राहकों को बैंक के दूसरे ओर इकट्ठा किया। अपराधियों ने हथियार के बल पर स्ट्रॉन्ग रूम में रखे रुपये उठाये और एक एक कर बैंक से बाहर निकल गए। सब कुछ इतनी जल्दी हुआ की किसी को कुछ समझ में आता, तब तक लुटेरे बाइक पर बैठकर इटाढ़ी की ओर फरार हो गये।
घटना के तुरंत बाद पुलिस को दी गई सूचना
घटना के दौरान लुटेरों ने किसी को मोबाइल नहीं निकालने दिया। इस बीच लुटेरों ने इटाढ़ी थाना क्षेत्र के एकडढ़वा निवासी राहुल जो रुपये जमा करने आया था, उसके भी पांच हजार लूट लिए। जिसके कारण वह काफी दुखी था। घटना के बाद जब अपराधी बैंक से बाहर चले गए, तब कैशियर ने एसपी को मामले की सूचना दी। जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी में एसडीपीओ, मुफस्सिल व इटाढ़ी थानेदार को घटना स्थल पर जुटने का निर्देश दिया। उसके बाद सभी लोग घटना से जुड़े सबूतों की तलाश में लग गए। पुलिस के पास सबसे बड़ा सबूत फिलहाल सीसीटीवी फुटेज है। जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
लुटेरों के पास थी बैंक से जुड़ी जानकारी
बैंक लूट की घटना की जांच कर रहे एसपी ने यह महसूस किया कि इस लूटकांड में लुटेरों के पास बैंक से जुड़ी सारी जानकारी थी। किस समय भीड़ कम होती है, बैंक के कर्मी लंच के पहले थोड़ा बेफिक्र हो जाते हैं, घटना दिन ब्रांच मैनेजर की छुट्टी, कैशियर पर बैंक के कार्यों का दबाव आदि सब कुछ उन लोगों को मालूम था। सीसीटीवी फुटेज में चेहरे ढके होने के कारण अपराधियों की शिनाख्त नहीं हो पाई।
लेकिन, उनकी कद-काठी, चाल-ढाल व पहनावे से जुड़ी जानकारी सभी थानों में भेज दी गयी है। दूसरी ओर, एसपी ने तत्काल सभी थानों को सघन वाहन जांच शुरू करने का निर्देश दिया। ताकि, अपराधियों को धड़ल्ले से पकड़ा जा सके। वहीं, मामले में एसडीपीओ ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। लोगों ने बताया कि धान रोपनी का समय और दोपहर होने के कारण उक्त स्थान पर अभी लोगों का आना कम रहता है। जिसके कारण लुटेरे वारदात को आसानी से अंजाम दे सके।
अज्ञात लुटेरों पर दर्ज की गई प्राथमिकी, छापेमारी जारी
घटना की तीव्रता को देखकर लगता है कि वारदात में शामिल लुटेरे काफी शातिर हैं। लूटने से पहले लुटेरों ने बैंक की पूरी तरह रेकी की है। हालांकि, बैंक कर्मचारियों से पूछताछ कर पिछले दिन के कैश की लेनदेन की जानकारी ली गई है। उन्होंने बताया कि बैंक से 4.56 हजार की लूट हुई व एक ग्राहक से पांच हजार। मामले में सात अज्ञात लुटेरों पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए विशेष टीम का गठन किया गया है। जल्द ही लुटेरे पुलिस की गिरफ्त में होंगे।- उपेंद्रनाथ वर्मा, एसपी, बक्सर
बैंक व कैश वैन से अब तक की गई लूट के आंकड़े
- वर्ष 2000 के सितंबर माह में एसबीआई ब्रह्मपुर के कैश वैन से भैंसहा पुल के पास 10 लाख लूटा था।
- वर्ष 2003 में नियाजीपुर में बैंक लूट
- वर्ष 2005 में नया भोजपुर स्थित मध्य ग्रामीण बैंक में लूट।
- वर्ष 2006 में रघुनाथपुर मध्य बिहार ग्रामीण बैंक में लूट।
- वर्ष 2008 में 15 मार्च को चौसा एसबीआई से गार्ड को गोली मारकर 4.40 लाख रुपये लूटे थे।
- वर्ष 2014 के सितंबर माह में जलहरा के इलाहाबाद बैंक शाखा से 15 लाख रुपए लूटे थे।
- वर्ष 2017 में नवंबर में इलाहबाद बैंक के इटढ़िया शाखा से पौने पांच लाख लुटे थे
- वर्ष 2019 में 20 दिसंबर माह में सोनवर्षा दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक से 11.38 लाख की लूट
- वर्ष 2020 में एक जनवरी को शहर के गोलंबर स्थित मिनी कैश बैंक कैश पार कंपनी से 15 हजार की लूट
लूट में जेनरेटर संचालक की भूमिका संदिग्ध, दस टीमें कर रही हैं विभिन्न इलाकों में छापेमारी
महदह बैंक ऑफ इंडिया में हुई लूटकांड से आस-पास के बैंकों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। वहीं पुलिस दस टीमें बनाकर विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही है। बैंक लूट कांड में पुलिस की शक बैंक के स्थानीय एक-दो कर्मचारियों पर भी है। जिनसे पुलिस पूछताछ कर रही है। सूत्रों कि मानें तो बैंक के मेन गेट पर ताला बंद था। कोरोना वायरस के डर से गेट से उपभोक्ताओं की निकासी व जमा हो रही थी।
उसी बीच लाइट चली गई। जिसके बाद जेनरेटर चालक धर्मेंद्र कुमार के द्वारा गेट खोल कर गए और इधर हथियार बंद लूटेरे बैंक परिसर में दाखिल हुए कर्मचारियों को बंधक बनाया और 4,61000 लाख रुपये लेकर भाग गए। सूत्रों ने बताया कि घटना से कुछ देर पहले ही बक्सर एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा पुलिस लाइन के लिए गुजरें थे। उसके बाद ही इस घटना को अंजाम दिया।
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