बैकुंठपुर में 50 घर बह गए,14 पंचायतों की 2 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित
बरौली के बाद नारायणी का क्रोध अब बैकुंठपुर में कहर बरपा रहा है। नदी के दबाव से 14 घंटे के भीतर एक-एक कर छह जगहों पर सारण बांध ध्वस्त हो गया है। बैकुंठपुर में अचानक जल प्रलय की स्थिति बन गई है। पानी की तेज धारा ने करीब 50 लोगों को बेघर कर दिया है। वहीं 14 पंचायतों की करीब 2 लाख आबादी बाढ़ से तबाह हो गई है। इस प्रखंड के शेष 8 पंचायत भी नदी के निशाने पर आ गए हैं।
उधर बरौली के देवापुर और मांझा पुरैना में शुक्रवार को सारण बांध टूटने के बाद बरौली के सभी 31 पंचायत और मांझा के 4 पंचायत पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ का सैलाव बरौली को डुबोते हुए सिधवलिया प्रखंड में प्रवेश कर गया है। इससे सिधवलिया के शेर, बखरौर, जलालपुर, मटौली, खजुरियां, चांद परना के इलाके जलमग्न हो गए हैं। बरौली से चला बाढ़ का पानी सिधवलिया के रास्ते आज दोपहर तक बैकुंठपुर प्रखंड के दक्षीण-पश्चिम के 8 पंचायतों में प्रवेश कर जाएगा।
दर्जनों घर नदी में समाहित
बांध टूटते ही बैकुंठपुर गांव के समीप दर्जन भर से अधिक कच्चे मकान नदी के तेज धार में बह गए। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई है। लोग तेजी से पलायन कर रहे हैं। गम्हारी के प्रह्लाद प्रसाद ने फोन पर बताया कि यहां 70 परिवार बाढ़ के पानी फंसे हुए हैं। लोग जैसे-तैसे लकड़ी का नाव बनाकर बाहर निकल रहे हैं।
सर्पदंश की बढ़ रही घटनाएं
प्रभावित इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि बाढ़ के पानी में बहकर आए पहाड़ी सांप तटबंध पर टेंट में प्रवेश कर जा रहे हैं। सर्पदंश से पीड़ित अवस्था में प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने में उन्हें परेशानी हो रही है। बाढ़ पीड़ितों की माने तो विषैले सांप के कहर से बचाव के लिए तटबंध ऊपर 24 घंटे मेडिकल टीम आवश्यक है।
आपदा ने मिटाई अमीर- गरीब की दूरी
बाढ़ की विभीषिका ने अमीर- गरीब की दूरी पूरी तरह मिटा दी है। यह हकीकत बैकुंठपुर प्रखंड के जमींदारी बांध, राजस्व छड़की एवं सारण तटबंध पर शरण ले रहे परिवारों के बीच देखा जा सकता है। अमीर हो या गरीब। प्लास्टिक के टेंट में लोगों की जिंदगी कट रही है। कई ऐसे परिवार हैं जिन्हें प्लास्टिक तक नसीब नहीं हो सका है। ऐसे लोग खुले आसमान तले तटबंध पर समय गुजार रहे हैं। यहां न कोई अमीर है न कोई गरीब। सब एक समान बाढ़ पीड़ित के नाम से जाने जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से जब अधिकारियों की टीम निरीक्षण के लिए तटबंध पर पहुंचती है तो अमीर-गरीब दोनों एक साथ कुछ राहत मिलने की उम्मीद में सामने खड़े हो जा रहे हैं।
चहुंओर लोगों की चीख-पुकार
तीनों प्रखंड में चारों तरफ हाहाकार की स्थिति उत्पन्न हो गई है। लोग अपना घर-बार छोड़कर पलायन करने लगे हैं। सगे -संबंधी से लेकर सुरक्षित स्थान की तलाश में लोग घरों से निकल पड़े हैं। तटबंध के टूटने से बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा चलाई जा रही बचाव कार्य की भी पोल खुल गई है। जैसे-जैसे नए गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है अफरा-तफरी व पलायन की समस्या विकराल होती जा रही है। रिटायर्ड सारण बांध टूटने के बाद प्रखंड मुख्यालय का दिघवा दुबौली भी बाढ़ की चपेट में आ जाएगा।
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