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हैदराबाद से 58 और सांगली से 42 प्रवासी ट्रकों में ठूंस-ठूंसकर आए घर

हैदराबाद से 58 और सांगली से 42 प्रवासी ट्रकों में ठूंस-ठूंसकर आए घर

कल तक जो मजदूर रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों के लिए पलायन कर रहे थे, आज वही मजदूर मजबूर होकर ट्रक-टेंपो, बाइक व पैदल ही जैसे-तैसे अपने घर को लौट रहे है। सीतामढ़ी के कोरलहिया बॉर्डर पर सोमवार की सुबह दर्जनों मजदूरों का जमावड़ा लगा था। ये मजदूर अपनी मजबूरी बयां कर रहे थे। ट्रक में भेड़-बकरी की तरह ठूंस-ठंूसकर लौट रहे प्रवासी मजदूरों को जब सीमा पर रोका जा रहा था, तो वे अपनी मजबूरियों बयां करना नहीं भूल रहे थे। हैदराबाद से आ रहे मजदूरों से खचाखच भरा एक ट्रक को कोरलहिया में रोका गया। इसमें 58 मजदूर सवार थे। ट्रक के ढाला में बैठे इन मजदूरों का शरीर एक दूसरे से दबा हुआ था। बाहर निकलते ही मौजूद दंडाधिकारी से कहा-साहब! जो कुछ कार्रवाई अथवा जांच करनी है, जल्दी कीजिए। क्योंकि ट्रक में बैठे ये मजदूर दो दिनों से भूखे हैं। दंडाधिकारी इन मजदूरों का स्क्रीनिंग कराना चाहते थे। लेकिन, कोरलहिया सीमा पर ड्यूटी में तैनात मेडिकल टीम नहीं थी। 20 मिनट के इंतजार करने के बाद जब अधिकारियों से फोन पर संपर्क नहीं हुआ और मेडिकल टीम नहीं पहुंची, तो दंडाधिकारी ने रहम करते हुए इन मजदूरों को बगैर स्क्रीनिंग के ही जाने की इजाजत दे दी। मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन में फैक्ट्री का काम बंद हो गया। पैसे भी खत्म हो गए। जो कुछ पैसे बचे थे, ट्रक भाड़ा में दे दिए। अब घर पर जाने पर ही कुछ मिलेगा।
सांगली से सीतामढ़ी तक के लिए मिनी ट्रक के ड्राइवर ने प्रति व्यक्ति लिए थे दो-दो हजार रुपए
कोरलहिया बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मी ने मजदूरों से भरा दूसरी छोटा ट्रक रोका। इस ट्रक पर भेड़-बकरी की तरह 42 व्यक्ति सवार थे। इस पर सवार मजदूरों को उतारकर स्क्रीनिंग के लिए लाइन में खड़ा करा दिया गया। आधा घंटा इंतजार करने के बाद भी डॉक्टरों की टीम सुबह के 8:45 बजे तक नहीं पहुंची थी। प्रवासी मजदूरों ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि वे लोग महाराष्ट्र के सांगली से आ रहे हंै। जाे थोड़े-बहुत पैसे बचे थे, ट्रक भाड़ा में चला गया। सीतामढ़ी पहुंचाने के लिए दो हजार रुपए लिए गए।
सिपाही जी! गुरुग्राम से पैदल आ रहे हैं, अब चला नहीं जाता, कुछ उपाय कीजिए...
पैदल आ रही एक दंपती कोरलहिया बॉर्डर पर पहुंचते ही सड़क पर ही बैठ गई। सड़क पर खड़े पुलिस कर्मी ने उठाते हुए पूछा-कहां से आ रहे हो, कहां जाना है? रवि कुमार अपनी पत्नी सुषमा कुमारी को सड़क से उठाते हुए पुलिसकर्मी से कहा-सिपाही जी! गुरुग्राम से पैदल आ रहे हंै। अब नहीं चला जाता। कुछ तो उपाय करा करा दीजिए। सिपाही ने बालू से भरे एक ट्रक को रोका। महिला दंपत्ति की मजबूरी को सुनाते हुए ट्रक में बैठा लेने को कहा।
मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी तक के 500 रुपए लिए
ऑटो पर सवार चार व्यक्ति नागालैंड से आ रहे थे। इसमें सवार विनोद दास ने बताया कि राजधानी एक्सप्रेस से मुजफ्फरपुर तक लाया गया। लेकिन वहां कोई सवारी नहीं थी। ऑटोवाले कहा- पांच सौ रुपए प्रति व्यक्ति देना होगा। गांव तक पहुंचा देंगे। चारों व्यक्ति को डुमरा प्रखंड के रिखौली गांव जाना है। इसी तरह कोई ऑटो पर सवार होकर, तो कोई ट्रक से, तो काई पैदल ही जा रहे थे।
सिर्फ सैदपुर वालों की ही स्क्रीनिंग की गई
कोरलहिया बॉर्डर पर मेडिकल टीम की ड्यूटी 24 घंटे की है। 3 शिफ्ट में मेडिकल टीम की ड्यूटी निर्धारित की गई थी। लेकिन, सोमवार की सुबह 7 बजे से ही मेडिकल टीम नहीं दिखी। स्क्रीनिंग के लिए मजूदरों को लाइन में खड़ा किया गया था। मेडिकल टीम सुबह 8:57 बजे पहुंची। आते ही डॉक्टर ने कहा-यहां रून्नीसैदपुर प्रखंड के व्यक्ति का ही स्क्रीनिंग की जाएगी। बाकी सभी को प्रखंडों में जांच कराने को कहा।



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ट्रक में ठूंस-ठूंसकर बैठे हुए हैदराबाद से अाए प्रवासी।


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