केंद्र के नए विद्युत अधिनियम में राज्यों के पावर-कट की तैयारी
(आलोक चन्द्र)पावर सेक्टर में राज्यों का पावर कट हो सकता है। केन्द्र मौजूदा विद्युत अधिनियम में बदलाव की तैयारी में है। इसमें राज्यों के अधिकारों में कटौती हो सकती है। यही नहीं इसमें कुछ सेक्टरों में प्राइवेटाइजेशन के लिए भी रास्ता बनाने की योजना है। साथ ही स्टेट रेगुलेटरी कमीशन का अधिकार प्रक्षेत्र भी सीमित हो सकता है। यहां तक कि स्टेट कमीशन के सदस्य की नियुक्ति का अधिकार भी उससे छिन सकता है। यह अधिकार भी केन्द्रीय कमेटी के पास होगी। एक बड़ा बदलाव अंतर्देशीय बिजली के लेन-देन को अपेक्षाकृत और सरल बनाने की कार्ययोजना है। फिलहाल तो केंद्र ने इस अधिनियम में संभावित परिवर्तन के साथ नए संशोधित अधिनियम का प्रारूप सभी राज्यों को भेजा है।
बिहार को भी प्रारूप की काॅपी मिली, ऊर्जा मंत्री बोले- कर रहे अध्ययन
बिहार को भी प्रारुप की काॅपी मिली है। राज्य इसका अध्ययन कर रहा है। अधिनियम के नए प्रावधान में स्टेट रेगुलेटरी कमीशन के अधिकार क्षेत्र को कम करने का प्रस्ताव है। वे बिजली शुल्क तो तय करेंगे लेकिन उनके अन्य कई अधिकार केन्द्रीय अथॉरिटी को पास जाएंगे। इस संबंध में इलेक्ट्रिसिटी कान्ट्रैक्ट अथॉरिटी बनाने की योजना है। यह राज्य के विवादों को निपटाने का काम करेगा। इसी तरह डिस्ट्रीब्यूशन सब लाइसेंसी के प्रावधान से कुछ सेक्टरों में निजी क्षेत्र की इंट्री का रास्ता निकल सकता है। एक बड़ा बदलाव अंतर्देशीय बिजली के आदान-प्रदान को लेकर है। भारत अपने निकट के पड़ोसी देशों को पहले की अपेक्षा सहजता से बिजली दे सकेगा और ले सकेगा। अब दोनों देशों की बिजली कंपनियां भी तय प्रावधान के आधार पर बिजली ले सकेंगी या दे सकेंगी। भारत का इस समय भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से बिजली संबंध है।
केन्द्रीय विद्युत अधिनियम का प्रारुप मिला है। फिलहाल हम इसका अध्ययन कर रहे हैं। अभी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।- विजेंद्र प्रसाद यादव, ऊर्जा मंत्री
कुछ मुद्दों पर राज्यों से हो सकता है केंद्र का टकराव
प्रस्तावित अधिनियम में कुछ मुद्दों पर केंद्र का राज्यों से टकराव हो सकता है। राज्यों के अधिकार सीमित करने, रेगुलेटरी कमीशन के अधिकार में प्रवेश और प्राइवेटाइजेशन के संभावित प्रावधान को कई राज्य स्वीकार नहीं करेंगे। सबसे बड़ा विवाद तो स्टेट कमीशन के सदस्यों के चयन को लेकर होगा। राज्य के अधिकार खत्म करना कई राज्य स्वीकार नहीं करेगा। बिहार भी इसका विरोध कर सकता है।
राज्यों को 7 मई तक देना है सुझाव-संशोधन प्रस्ताव
ऐसे बिहार पहले ही प्राइवेटाइजेशन पर अपना विरोध प्रकट कर चुका है। अंतर्देशीय बिजली आदान-प्रदान के प्रावधान से भी बिहार प्रभावित होगा। केंद्र ने ड्राफ्ट को लेकर राज्यों को 7 मई तक का समय दिया है। इसी अवधि में उसे अपना सुझाव-संशोधन प्रस्ताव देना है। अब 3 मई तक लॉकडाउन है। राज्यों में काम सुचारु रूप से संचालित नहीं हो रहे। एेसे में राज्य इसका कितना अध्ययन करेगा और क्या सुझाव देगा, यह बड़ा सवाल है।
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