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24 अप्रैल तक 40 हजार के लक्ष्य के विरुद्ध 36635.428 एमटी धान की हुई है खरीदारी

24 अप्रैल तक 40 हजार के लक्ष्य के विरुद्ध 36635.428 एमटी धान की हुई है खरीदारी

जिले में 15 नवंबर से शुरू हुई धान की अधिप्राप्ति के 162 दिन गुजर जाने के बाद 24 अप्रैल तक 172 पैक्सों द्वारा 36635.428 मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति हुई है। यह सरकार द्वारा निर्धारित 40 हजार मीट्रिक टन की खरीदारी के करीब माना जा रहा है। वैसे तो सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि 31 मार्च तक घोषित की गई थी किंतु कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जारी लॉकडाउन के कारण धान अधिप्राप्ति की रफ्तार को देखते हुए विभाग ने इसकी सीमा 30 अप्रैल तक बढ़ा दी है।
सहकारिता विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान 142 पैक्सों व व्यापार मंडलों द्वारा 5775 किसानों से खरीदे गए धान में सर्वाधिक 8601 एमटी धान की खरीदारी सिंहेश्वर के 12 पैक्सों द्वारा की गई है। सबसे कम 967 एमटी धान की खरीदारी ग्वालपाड़ा के 8 पैक्सों द्वारा की गई है। अगर स्थानीय व्यापारी किसी तरह से किसानों द्वारा बेचे गए धान को पैक्सों तथा व्यापार मंडलों में बेचते हैं तो उनको लाखों रुपए की बचत तो होगी ही साथ ही सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति का निर्धारित लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा।

जिले में 28 लाख 35 हजार 600 क्विंटल था पैदावार का लक्ष्य
जिला कृषि पदाधिकारी राजन बालन की माने तो जिले में 18 हजार एकड़ में लगाए गए धान से 28 लाख 35 हजार 600 क्विंटल पैदावार का लक्ष्य था। पिछले साल के आंकड़ों को देखें तो अगर समय पर पैक्स द्वारा धान की खरीदारी की जाती तो किसान 8 लाख 35 हजार 600 क्विंटल धान की बिक्री पैक्स में कर पाते। धान की स्थानीय व्यापारियों के हाथ बिक्री होने तथा कोरोना संक्रमण को ले लॉकडाउन होने के कारण 52 हजार से अधिक किसानों को लगभग 38 करोड़ 85 लाख 54 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा।

ग्वालपाड़ा में हुई है सबसे कम खरीदारी
जिला सहकारिता विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कुल 162 दिन में जिले में 36635.428 एमटी धान की खरीदारी की गई है। इसमें सिंहेश्वर पैक्स ने सर्वाधिक धान की खरीदारी की है। जबकि ग्वालपाड़ा के आठ पैक्सों ने सबसे कमधान की खरीदारी की है।

लॉकडाउन के कारण नहीं पूरा हो सका लक्ष्य
कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर जिले में प्रशासन द्वारा लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। 24 मार्च से जारी लॉकडाउन के कारण किसान संबंधित पैक्स पर नहीं पहुंच पाए, जिसके कारण धान की बिक्री नहीं हुई। लॉकडाउन को देखते हुए सरकार ने धान खरीददारी की अंतिम तिथि 30 अप्रैल तक बढ़ा दी है।
अरविंद कुमार पासवान, जिला सहकारिता पदाधिकारी, मधेपुरा



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किसान के घर में रखा गया धान।


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