लॉकडाउन में जिले के 18 सौ स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई के साथ मध्याह्न भोजन भी बंद
कोरोना वायरस महामारी को ले राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन एक माह पूरे हो गए। फिलहाल तीन मई तक लॉकडाउन है। 25 मार्च से शुरू लॉकडाउन के कारण सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी स्कूल कॉलेज से लेकर सभी तरह के शिक्षण संस्थान व तकनीकि कॉलेजों में ताले लटके हैं।
जिले के 1800 प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के करीब 4 लाख बच्चों की पढ़ाई तो बाधित है ही, उन्हें एमडीएम भी नहीं मिल पा रहा है। पहले शिक्षकों की हड़ताल और फिर कोरोना संकट से बच्चे और अभिभावक दोनों परेशान हैं। स्कूलों में फरवरी माह तक लाउडस्पीकर से प्रार्थना से लेकर घंटी बजने व बच्चों की उपस्थिति, एमडीएम खाने को लेकर आपाधापी व छुट्टी होने पर घर जाने के लिए बच्चों की उत्सुकता को ले उत्सवी माहौल हुआ करता था। तीन से 13 फरवरी तक इंटर की परीक्षा व 17 से 24 फरवरी मैट्रिक परीक्षा हुई।
लॉकडाउन को छुट्टी के रूप में ले रहे बच्चे, पढ़ाई से हो रहे वंचित
लॉकडाउन को अधिकतर बच्चे छुट्टी के रूप में ले रहे हैं। लेकिन पढ़ाई के प्रति जवाबदेह अभिभावक से लेकर बच्चे अपने घरों में रहते हुए भी पढ़ाई में जुटे हैं। कोई ऑनलाइन पढ़ाई करने में जुटे हैं तो कोई रचनात्मकता में। हालांकि अधिकतर बच्चे लॉकडाउन को मानो वह छुट्टी के रूप में मनाने में व्यस्त हो गए हैं। इसका अधिकतर बच्चों पर व्यापक असर पड़ सकता है। निजी स्कूलों में हरियाली व सफाई पहले की तरह है।
कुछ जगह स्कूल में चल रहा क्वारेंटाइन सेंटर
हालांकि कोरोना वायरस को लेकर बिहार सरकार के निर्देश पर 14 मार्च से ही स्कूल कॉलेज से लेकर हॉस्टल तक बंद कर दिये गये थे। 25 मार्च से 14 अप्रैल तक जिले के लगभग सभी पंचायतों में कम से कम एक-एक स्कूल को क्वारेंटाइन सेंटर बनाये जाने से कुछ चहलकदमी थी। इसी बहाने स्कूल के एचएम से लेकर पंचायत के प्रतिनिधि व सरकारी मुलाजिमों का आना जाना होता था। क्वारेंटाइन के 14 दिन की अवधि पूरी करने के बाद वैसे लोगों के अपने घरों में चले जाने से वैसे स्कूलों में भी विरानगी है। कहीं, अभी भी क्वारेंटाइन सेंटर में लोग रह रहे हैं। जिले में लगभग 1800 प्रारंभिक स्कूल हैं।
17 से प्रारंभिक तो 25 फरवरी से माध्यमिक स्कूल के शिक्षक हड़ताल पर
मांगों के समर्थन में राज्यव्यापी आह्वान पर 17 फरवरी से प्रारंभिक स्कूलों के शिक्षक तो 25 फरवरी से माध्यमिक शिक्षकों के हड़ताल पर चले गये। इससे हाईस्कूल में ताले आज भी लटके हैं, तो नियोजित शिक्षकों के हड़ताल पर जाने के बाद भी स्कूल खुले रहे।
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